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एक युगांतरकारी सम्मान: ‘नेसेट पदक’ और भारत-इज़राइल के ‘अभेद्य’ सामरिक संबंधों का विश्लेषण

रणनीतिक साझेदारी: रक्षा से लेकर नवाचार तक

भारत और इज़राइल के संबंधों के आधुनिक इतिहास में 2026 की यह घटना एक स्वर्णिम मील के पत्थर के रूप में दर्ज हो गई है। इज़राइल की संसद, ‘नेसेट’ (Knesset) द्वारा भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से सम्मानित करना न केवल एक राजनयिक औपचारिकता है, बल्कि यह दो प्राचीन सभ्यताओं के बीच उस प्रगाढ़ विश्वास का प्रतीक है जो पिछले एक दशक में अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुँचा है। प्रधानमंत्री मोदी इस सम्मान को प्राप्त करने वाले दुनिया के पहले नेता बन गए हैं। यह पदक केवल उनके व्यक्तिगत नेतृत्व की सराहना नहीं है, बल्कि भारत की 1.4 अरब जनता और उसकी बढ़ती वैश्विक साख के प्रति इज़राइल के लोकतंत्र का सर्वोच्च सम्मान है।

जब हम अंतरराष्ट्रीय राजनीति की बात करते हैं, तो ‘सर्वोच्च नागरिक सम्मान’ अक्सर राष्ट्रों के बीच की मित्रता को दर्शाते हैं। लेकिन जब किसी देश की संसद (Legislature) स्वयं आगे बढ़कर किसी विदेशी राष्ट्रप्रमुख को पदक प्रदान करती है, तो वह उस देश के संपूर्ण राजनीतिक स्पेक्ट्रम की सहमति और सम्मान को दर्शाता है। इज़राइल की नेसेट द्वारा पीएम मोदी को यह सम्मान देना यह प्रमाणित करता है कि इज़राइल में भारत के प्रति प्रेम और सम्मान किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं, बल्कि वहां की राष्ट्रीय चेतना का हिस्सा बन चुका है।

‘नेसेट’ इज़राइल की सर्वोच्च विधायी संस्था है। इज़राइली लोकतंत्र में संसद का स्थान अत्यंत पवित्र है। इस पदक का ‘प्रथम प्राप्तकर्ता’ (First-ever Recipient) होना पीएम मोदी को वैश्विक कूटनीति के एक विशिष्ट पायदान पर खड़ा करता है। यह इज़राइल के इतिहास में एक ‘अनूठी’ घटना है। पदक के साथ दिए गए प्रशस्ति पत्र में पीएम मोदी के “साहसिक विजन” और “दृढ़ व्यक्तिगत नेतृत्व” की सराहना की गई है। यह इस बात की स्वीकृति है कि 2014 के बाद भारत की ‘इज़राइल नीति’ में जो मौलिक बदलाव आए, उन्होंने न केवल द्विपक्षीय संबंधों को बदला, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति (Geopolitics) को भी प्रभावित किया।

इस सम्मान की नींव 2017 में रखी गई थी, जब नरेंद्र मोदी इज़राइल की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने थे। दशकों तक भारत ने इज़राइल के साथ संबंधों को फिलिस्तीन के मुद्दे के साथ जोड़कर (Hyphenated) रखा था। पीएम मोदी ने इस ‘वैचारिक हिचकिचाहट’ को समाप्त किया और इज़राइल के साथ स्वतंत्र रूप से मजबूत संबंध विकसित किए। बेंजामिन नेतन्याहू और पीएम मोदी के बीच की व्यक्तिगत केमिस्ट्री ने नौकरशाही की बाधाओं को दूर किया और ‘रक्षा’, ‘कृषि’ और ‘जल’ जैसे क्षेत्रों में त्वरित निर्णयों का मार्ग प्रशस्त किया।

इज़राइल की संसद ने यह सम्मान भारत-इज़राइल “रणनीतिक संबंधों” को मजबूत करने के लिए दिया है। पिछले कुछ वर्षों में यह साझेदारी ‘खरीद-बिक्री’ से बढ़कर ‘सह-विकास’ (Co-development) तक पहुँच गई है इज़राइल भारत के लिए रक्षा उपकरणों का एक प्रमुख स्रोत है। बराक-8 मिसाइल प्रणाली और फाल्कन अवाक्स (AWACS) जैसे प्रोजेक्ट्स दोनों देशों के गहरे सुरक्षा सहयोग के उदाहरण हैं। अब यह ‘मेक इन इंडिया’ के तहत संयुक्त उत्पादन की ओर बढ़ रहा है।

इज़राइल की ‘ड्रिप इरिगेशन’ तकनीक ने भारतीय किसानों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। भारत में स्थापित दर्जनों ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (CoE) इज़राइली तकनीक का लाभ उठा रहे हैं। दुनिया के सबसे उन्नत साइबर सुरक्षा देशों में से एक होने के नाते, इज़राइल भारत के साथ अपनी ‘क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर’ सुरक्षा की जानकारी साझा कर रहा है।

पीएम मोदी को मिला यह सम्मान भारत की मध्य-पूर्व (Middle East) नीति की सफलता का भी सूचक है। भारत, इज़राइल, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अमेरिका के बीच बना यह समूह वैश्विक राजनीति का एक नया ध्रुव है। यह दिखाता है कि भारत अब इज़राइल और अरब देशों के साथ एक साथ, बिना किसी तनाव के, प्रगाढ़ संबंध रख सकता है। इज़राइल के अरब देशों के साथ सुधरते संबंधों में भारत ने एक ‘ब्रिज’ (सेतु) की भूमिका निभाई है। ‘नेसेट पदक’ भारत की इसी ‘शांतिदूत’ और ‘संतुलनकर्ता’ की छवि को सम्मानित करता है।

भारत और इज़राइल दोनों ही दशकों से सीमा पार आतंकवाद के शिकार रहे हैं। नेसेट ने पीएम मोदी के उस वैश्विक अभियान को सराहा है जिसमें वे आतंकवाद की परिभाषा तय करने और उसे जड़ से मिटाने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात करते हैं। दोनों देशों की खुफिया एजेंसियों (RAW और Mossad) के बीच का तालमेल आज पहले से कहीं अधिक मजबूत है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अनिवार्य है।

यह पदक केवल सैन्य या आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक भी है। भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में से है जहाँ यहूदी समुदाय कभी भी उत्पीड़न का शिकार नहीं हुआ। नेसेट ने भारत की इस ‘सहिष्णुता और समावेशिता’ को भी नमन किया है। योग, आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति की इज़राइल में बढ़ती लोकप्रियता ने दोनों देशों के लोगों के बीच (People-to-People) संबंधों को गहरा किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया गया ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ इस बात की घोषणा है कि भारत अब एक ‘खिलाड़ी’ (Player) नहीं, बल्कि एक ‘नियम निर्माता’ (Rule-maker) है। इज़राइल जैसा छोटा लेकिन तकनीकी रूप से महाशक्तिशाली देश जब भारत को अपना सबसे बड़ा रणनीतिक साझेदार मानता है, तो यह भारत की ‘विश्वबंधु’ की छवि को वैश्विक पटल पर और भी ऊंचा उठाता है।

यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा है कि राष्ट्रहित में लिया गया साहसिक निर्णय न केवल देश का भाग्य बदलता है, बल्कि दुनिया की नजरों में उस देश का कद भी बढ़ा देता है। ‘नेसेट’ से निकला यह संदेश स्पष्ट है भारत और इज़राइल का यह ‘रणनीतिक गठबंधन’ केवल दो सरकारों के बीच नहीं, बल्कि दो अटूट विश्वासों के बीच है, जो 21वीं सदी की चुनौतियों का मिलकर सामना करने के लिए तैयार हैं।

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