राष्ट्रीय
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IIT कानपुर: मेधावी छात्रों की मौन चीख और व्यवस्था की विफलता
यह एक अत्यंत गंभीर और हृदयविदारक विषय है। देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक, IIT कानपुर में हो…
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सितारों के बीच एक अमिट पदचिह्न: सुनीता विलियम्स की कालजयी विरासत
भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स का नासा (NASA) से सेवानिवृत्त होना केवल एक व्यक्तिगत करियर का अंत नहीं…
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डिजिटल ब्रिक्स: सीमा पार लेन-देन के लिए एक नई वैश्विक वित्तीय व्यवस्था
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ब्रिक्स (BRICS) देशों की सेंट्रल बैंक डिजिटल मुद्राओं (CBDCs) को आपस में जोड़ने का प्रस्ताव…
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भाजपा में ‘नवीन’ युग का आगाज़ और युवा नेतृत्व की हुंकार
मंगलवार का दिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। दिल्ली…
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रफ्तार पर इंसानियत की जीत: 10-मिनट डिलीवरी का अंत और एक सुरक्षित भविष्य की शुरुआत
आज के डिजिटल युग में, जहाँ तकनीक हमारी उंगलियों के पोरों पर नाचती है, ‘सुविधा’ एक नया धर्म बन गई…
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डर बनाम तथ्य: ईरान को लेकर भारतीय निर्यातकों की घबराहट कितनी सही?
पिछले कुछ दिनों से भारतीय व्यापारिक गलियारों में एक ही चर्चा है—ईरान। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर…
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सूचना का संकट: सच और झूठ के बीच धुंधलाता रास्ता
बीस साल पहले कहा जाता था कि “ज्ञान ही शक्ति है।” लेकिन आज के डिजिटल युग में, यह कहावत बदल…
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जब शीत लहर बन जाए दुश्मन: उत्तर भारत की जमती सुबह और प्रशासनिक सुस्ती
उत्तर भारत में सर्दियों का आना कभी गुलाबी ठंड और गुनगुनी धूप का अहसास कराता था, लेकिन पिछले कुछ दशकों…
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सुरक्षा Vs करुणा: आवारा कुत्तों के मुद्दे पर समाज की उलझन
हाल के वर्षों में भारत के लगभग हर शहर और कस्बे से एक जैसी खबरें आ रही हैं कहीं किसी…
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लोकतंत्र की कसौटी: जब मतदाता सूची से गायब होते हैं करोड़ों नाम
भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में चुनाव को एक उत्सव माना जाता है। लेकिन इस उत्सव की पहली शर्त है मतदाता…
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भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौता: रिश्तों की नई उड़ान और आर्थिक संभावनाओं का उदय
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी विदेश नीति और व्यापारिक दृष्टिकोण में एक बड़ा बदलाव दिखाया है। भारत अब…
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सरेआम कत्ल, सरेआम सवाल: क्या बांग्लादेश में कानून का राज खत्म हो रहा है?
एक समय था जब बांग्लादेश की पहचान उसकी तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुधारों से होती थी। लेकिन आज,…
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जब पीने का पानी ही जानलेवा बन जाए: इंदौर की त्रासदी और सार्वजनिक स्वास्थ्य की चेतावनी
इंदौर यह नाम सुनते ही हमारे मन में भारत के सबसे स्वच्छ शहर की तस्वीर उभरती है। वह शहर जिसने…
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पहचान की बहस और रोज़मर्रा की ज़िंदगी: जब संस्कृति विवाद का केंद्र बन जाए
कल्पना कीजिए कि आप सुबह की चाय पीते हुए सोशल मीडिया खोलते हैं और देखते हैं कि किसी विज्ञापन में…
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आस्था का सैलाब: भारतीय मंदिरों में उमड़ती भीड़ के पीछे का सामाजिक सच
पिछले कुछ वर्षों में भारत के धार्मिक परिदृश्य में एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। चाहे वह…
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