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एग्री-टेक स्टार्टअप्स: किसानों के नए साथी

पारंपरिक खेती से डिजिटल कृषि की ओर सफर

भारत का किसान सदियों से अपनी मिट्टी से जुड़ा रहा है। सुबह उठकर खेत जोतना, फसल बोना, बारिश का इंतजार करना—यह उसकी जिंदगी का हिस्सा था। लेकिन अब समय बदल रहा है। स्मार्टफोन, ड्रोन, ऐप्स और डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकें खेती को नया रूप दे रही हैं। छोटे से किसान रामू चाचा भी अब मौसम ऐप चेक करते हैं, ड्रोन से फसल देखते हैं, और ऑनलाइन मंडी में अनाज बेचते हैं। एग्री-टेक क्रांति आ रही है, जो किसानों को सशक्त बना सकती है। लेकिन बड़ा सवाल यह है इस डिजिटल दुनिया में किसान का डेटा किसका है? बड़ी कंपनियां या किसान खुद?

भारत में 14 करोड़ से ज्यादा किसान हैं। इनमें 86% छोटे और सीमांत किसान हैं, जिनके पास 2 हेक्टेयर से कम जमीन है। पारंपरिक खेती में अनिश्चितता बहुत थी कभी सूखा, कभी बाढ़, कभी बाजार में सही दाम न मिलना। उपज का 20-30% सड़ जाता था। लेकिन डिजिटल युग ने उम्मीद जगाई है।

2024 में लॉन्च हुई डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत सरकार 1 करोड़ किसानों को डिजिटल ट्रेनिंग दे रही है। PM-KISAN ऐप से सीधे खाते में पैसे आते हैं। eNAM प्लेटफॉर्म पर 2 करोड़ किसान रजिस्टर्ड हैं, जो 1000+ मंडियों से जुड़कर ऑनलाइन व्यापार करते हैं। इससे मध्यस्थों की संख्या घटी, और किसानों को 10-15% बेहतर दाम मिले।

उदाहरण लें महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के किसान बाजीराव। पहले वे अनुमान से खाद डालते थे। अब Fasal ऐप से मिट्टी का pH, नाइट्रोजन स्तर जानते हैं। IoT सेंसर खेत में लगे हैं जो रीयल-टाइम डेटा भेजते हैं। नतीजा? 25% ज्यादा उपज और 30% कम पानी। बाजीराव कहते हैं, “पहले भाग्य पर निर्भर थे, अब डेटा पर।”

भारत में 2500 से ज्यादा एग्री-टेक स्टार्टअप्स हैं। ये किसानों को बीज से बाजार तक मदद देते हैं। Ninjacart ट्रक से किसान को सीधे किराना दुकानदार से जोड़ता है। DeHaat 1.5 करोड़ किसानों को सलाह देता है। CropIn AI से फसल पूर्वानुमान करता है। सैप्लाई चेन मैनेज करता है।

ड्रोन तकनीक क्रांति ला रही है। DJI और भारतीय Garuda Aerospace के ड्रोन से कीटनाशक स्प्रे होता है। एक एकड़ में 15 मिनट में काम, जो पहले 2 दिन लगता था। आंध्र प्रदेश में 50,000 किसान ड्रोन इस्तेमाल कर रहे हैं। सरकार ने ‘ड्रोन दीदी’ स्कीम से 15,000 महिलाओं को ड्रोन पायलट बनाया।

सैटेलाइट इमेजरी से किसान Google Earth Engine या ISRO के Bhuvan पोर्टल से अपनी फसल की निगरानी करते हैं। पंजाब के किसान डेटा से गेहूं की बुवाई का सही समय तय करते हैं। इससे उपज 15-20% बढ़ी। लेकिन चुनौती यह है कि ये तकनीकें छोटे किसानों तक पूरी तरह नहीं पहुंचीं। 40% के पास स्मार्टफोन नहीं, ग्रामीण इंटरनेट 2G पर अटका है।

खेती अब डेटा पर निर्भर है। ऐप पर किसान मिट्टी डेटा डालता है, मौसम डेटा आता है, सलाह मिलती है। लेकिन यह डेटा कहाँ जाता है? स्टार्टअप्स के सर्वर पर। वहाँ से बीमा कंपनियों, उर्वरक कंपनियों तक। Monsanto, Bayer जैसी बड़ी कंपनियां डेटा से बाजार ट्रेंड समझती हैं, बीज बेचती हैं।

2024 में एक रिपोर्ट ने खुलासा किया कि किसानों का 70% डेटा बिना सहमति शेयर होता है। डेटा से कंपनियां कीमत तय करती हैं, किसान मजबूरन खरीदते हैं। साइबर अटैक से डेटा चोरी का खतरा। क्या किसान डेटा का मालिक है? नहीं। DPDP एक्ट 2023 डेटा प्राइवेसी की बात करता है, लेकिन कृषि डेटा पर स्पष्ट नियम नहीं। उदाहरण केरल के एक किसान ने ऐप से सलाह ली। बाद में उसी बीज कंपनी ने ऊंचा दाम लगाया। किसान ने कहा, “मेरा डेटा बेचा गया।” किसान डेटा बैंक (KDB) योजना से डेटा सुरक्षित होगा, लेकिन अभी प्रारंभिक चरण में।

डिजिटल खेती की राह आसान नहीं। 60% किसान ऐप नहीं समझते। स्थानीय भाषा में ट्रेनिंग जरूरी।  ग्रामीण 4G/5G कम। बिजली अनियमित। सोलर चार्जर मदद कर रहे। किसान डेटा चोरी का शिकार। ब्लॉकचेन से सुरक्षित संभव। बड़े किसान ड्रोन खरीदते, छोटे नहीं। सब्सिडी जरूरी। Reliance, ITC डेटा से बाजार कंट्रोल कर सकते। किसान सहकारी बनें। मध्य प्रदेश के किसान समूह ने अपना ऐप बनाया डेटा खुद रखा। इससे 20% लाभ बढ़ा। ऐसे मॉडल बढ़ें।

डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन (₹2,817 करोड़) से 2025 तक 10,000 ड्रोन हब, 1 लाख KCC डिजिटल कार्ड। किसान क्रेडिट कार्ड ऐप से लोन। Agri Stack से डिजिटल ID। लेकिन क्रियान्वयन धीमा। ग्रामीण डिजिटल ट्रेनिंग सेंटर बढ़ें। डेटा सॉवरेन्टी लॉ बनें किसान डेटा का मालिक।

डिजिटल कृषि से 30% उपज बढ़ोतरी, 20% लागत कटौती संभव। AI पूर्वानुमान से फसल बीमा सटीक। ब्लॉकचेन से ट्रेसिबिलिटी। लेकिन डेटा किसान का रहे। सहकारी ऐप्स, किसान डेटा ट्रस्ट बनें। राजस्थान के किसान रामेश्वर ने ड्रोन से जैविक खेती शुरू की। ऑनलाइन निर्यात किया। कमाई दोगुनी। ऐसे लाखों रामेश्वर बनें।

भूमि से बाइट तक का सफर किसानों को आत्मनिर्भर बनाएगा। लेकिन डेटा नियंत्रण किसान को मिले। सरकार, स्टार्टअप, किसान मिलकर काम करें। ट्रेनिंग, इंटरनेट, डेटा कानून से छोटा किसान भी डिजिटल हो। तभी भारत कृषि महाशक्ति बनेगा। डिजिटल खेती समृद्धि लाएगी, बशर्ते किसान इसका असली मालिक बने।

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