सराफा बाजार में ‘बजट क्रैश’: सोने-चांदी की गिरावट का पूरा विश्लेषण और निवेशकों का भविष्य
बजट 2026: नीतिगत बदलाव और बाजार का सेंटिमेंट

बजट 2026 के बाद भारतीय सराफा बाजार में आई गिरावट ने दशकों पुराने निवेश के सिद्धांतों को चुनौती दी है। 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए बजट के बाद सोने की कीमतों में 13,717 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी में 94,421 रुपये प्रति किलोग्राम की जो कमी दर्ज की गई, वह भारतीय कमोडिटी मार्केट के इतिहास में सबसे बड़ी गिरावटों में से एक है।
भारतीय संस्कृति में सोना केवल एक धातु नहीं, बल्कि ‘संपत्ति’ का सबसे विश्वसनीय रूप है। लेकिन बजट 2026 ने इस धारणा को हिलाकर रख दिया। चांदी का जो भाव जनवरी के अंत में 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के करीब मंडरा रहा था, वह अचानक लुढ़ककर 2.75 लाख रुपये के स्तर पर आ गया। ठीक यही स्थिति सोने की भी रही, जो अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से काफी नीचे खिसक गया।
सराफा बाजार की इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा ट्रिगर बजट में की गई घोषणाएं और निवेशकों की ‘अपेक्षाएं’ थीं। हालांकि सरकार ने आयात शुल्क में कोई आधिकारिक कटौती नहीं की, लेकिन बजट भाषण में ‘व्यापार सुगमता’ और ‘अवैध तस्करी रोकने’ के संकेतों ने व्यापारियों को यह महसूस कराया कि भविष्य में कीमतें सरकार के नियंत्रण में रहेंगी। इससे बाजार में मौजूद सट्टेबाजों ने अपनी पोजीशन कम करना शुरू कर दिया।
बजट 2026 में SGB के टैक्स लाभों को तर्कसंगत बनाया गया। अब केवल ‘प्राइमरी सब्सक्राइबर’ को ही टैक्स छूट मिलेगी, जबकि एक्सचेंज से खरीदने वालों के लिए यह Gold ETF की तरह ही टैक्सेबल होगा। इस घोषणा ने SGB के प्रति आकर्षण को थोड़ा कम किया, जिससे लिक्विडेशन बढ़ा।
भारतीय बाजार कभी भी अलग-थलग नहीं रहता। बजट के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों ने आग में घी डालने का काम किया। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल और फेडरल रिजर्व की नई मौद्रिक नीतियों के कारण डॉलर इंडेक्स 108-110 के स्तर पर पहुँच गया। नियम सीधा है जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोना सस्ता होता है। मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे संघर्षों में अचानक आई कमी और शांति वार्ता के संकेतों ने ‘सेफ हेवन’ (Safe Haven) के रूप में सोने की मांग को कम कर दिया। निवेशक अब जोखिम वाली संपत्तियों (शेयर बाजार) की ओर मुड़ रहे हैं।
चांदी में आई 94,421 रुपये की गिरावट ने सबसे ज्यादा चौंकाया। चांदी को ‘गरीबों का सोना’ कहा जाता है, लेकिन इसकी हालिया चाल ने अमीरों के भी पसीने छुड़ा दिए। कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) ने चांदी की अस्थिरता को देखते हुए मार्जिन बढ़ा दिया। इसका मतलब था कि ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन बनाए रखने के लिए अधिक पैसा जमा करना था। जिनके पास पैसा नहीं था, उन्होंने अपनी चांदी बेचना शुरू कर दिया, जिससे कीमतें और गिरीं। चांदी की औद्योगिक मांग (सोलर पैनल और ईवी) स्थिर है, लेकिन कृत्रिम रूप से बढ़ी हुई कीमतें अब अपने वास्तविक ‘फंडामेंटल’ स्तर पर लौट रही हैं।
कीमतों में आई इस भारी गिरावट को लेकर निवेशकों के मन में दो तरह के विचार हैं डर और अवसर। बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि सोना लंबी अवधि में हमेशा ऊपर जाता है। ₹13,000 की गिरावट उन लोगों के लिए बेहतरीन मौका है जो शादियों के सीजन के लिए या लंबी अवधि के लिए सोना खरीदना चाहते थे।
यदि आप एक निवेशक हैं, तो ‘मार्क-टू-मार्केट’ नुकसान से बचने के लिए एक साथ बड़ी राशि न लगाएं। डिजिटल गोल्ड या गोल्ड ईटीएफ में हर गिरावट पर थोड़ा-थोड़ा निवेश करें। यदि आप ट्रेडिंग कर रहे हैं, तो वर्तमान अस्थिरता को देखते हुए सख्त स्टॉप लॉस का पालन करें।
गिरावट ने ज्वैलर्स के लिए ‘दोधारी तलवार’ का काम किया है। कीमतें कम होने से शोरूमों में ग्राहकों की भीड़ बढ़ गई है, जिससे ‘रिटेल’ बिक्री में 20-25% की बढ़ोतरी देखी जा रही है। जिन ज्वैलर्स ने पुरानी ऊंची कीमतों पर सोना खरीदा था, उन्हें अपने मौजूदा स्टॉक पर नुकसान उठाना पड़ रहा है। बजट 2026 के बाद की यह गिरावट एक ‘स्वस्थ सुधार’ (Healthy Correction) है। पिछले एक साल में सोने ने लगभग 30% का रिटर्न दिया था, जो कि टिकाऊ नहीं था। ₹13,000 और ₹94,000 की ये गिरावटें बाजार को संतुलित करेंगी।
निवेशकों को यह समझना चाहिए कि सोने की ‘चमक’ कभी खत्म नहीं होती, लेकिन उसकी ‘कीमत’ हमेशा एक सीधी लकीर में ऊपर नहीं जाती। आने वाले हफ्तों में बाजार में और भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं, लेकिन लंबी अवधि के पोर्टफोलियो में सोने की जगह हमेशा बनी रहेगी।



