डिजिटल संप्रभुता या सेंसरशिप का नया युग? रूस का व्हाट्सएप बैन और ‘MAX’ का प्रभुत्व
सुरक्षा और जासूसी की चिंताएं

रूस द्वारा व्हाट्सएप (WhatsApp) पर प्रतिबंध लगाना और उसके स्थान पर स्वदेशी मैसेंजर ‘MAX’ को अनिवार्य रूप से थोपना, वैश्विक डिजिटल परिदृश्य में एक “लोहे के पर्दे” (Iron Curtain) के पुनः उभरने का संकेत है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव द्वारा इस प्रतिबंध की पुष्टि करना केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं है, बल्कि यह रूस की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसे ‘डिजिटल संप्रभुता’ कहा जा रहा है।
फरवरी 2026 में रूस ने तकनीकी जगत में एक बड़ा धमाका करते हुए दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप, व्हाट्सएप को अपनी सीमाओं के भीतर ब्लॉक कर दिया। यह निर्णय अचानक नहीं लिया गया, बल्कि यह पिछले तीन वर्षों से विदेशी सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ चल रहे रूसी ‘क्रैकडाउन’ की परिणति है।
दिमित्री पेसकोव और रूसी संचार नियामक ‘रोसकोम्नाडज़ोर’ (Roskomnadzor) ने इस प्रतिबंध के लिए तकनीकी और कानूनी तर्क दिए हैं रूसी कानून के अनुसार, किसी भी विदेशी कंपनी को रूसी नागरिकों का डेटा रूसी सर्वरों पर ही स्टोर करना होगा। मेटा (व्हाट्सएप की मूल कंपनी) ने सुरक्षा और गोपनीयता का हवाला देते हुए इस नियम को मानने से इनकार कर दिया था। रूस का आरोप है कि व्हाट्सएप का उपयोग यूक्रेन युद्ध के संबंध में ‘गलत सूचना’ फैलाने और आतंकवाद विरोधी कानूनों के उल्लंघन के लिए किया जा रहा था। क्रेमलिन अब ऐसी किसी भी तकनीक को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है जिसका नियंत्रण वाशिंगटन (अमेरिका) के हाथों में हो। व्हाट्सएप के ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन’ के कारण रूसी खुफिया एजेंसियां (FSB) नागरिकों के संदेशों की निगरानी नहीं कर पा रही थीं, जो इस प्रतिबंध का सबसे बड़ा कारण बना।
व्हाट्सएप के विकल्प के रूप में प्रमोट किया जा रहा ‘MAX’ केवल एक मैसेंजर नहीं है। इसे रूसी राज्य द्वारा समर्थित कंपनियों ने विकसित किया है और इसे रूस के ‘नेशनल ईकोसिस्टम’ का केंद्र बनाया गया है। MAX को चीन के ‘वीचैट’ की तर्ज पर बनाया गया है। इसमें चैट के अलावा डिजिटल वॉलेट, टैक्स भुगतान, पासपोर्ट सेवाएं और ‘गोसुसलुगी’ (सरकारी सेवा पोर्टल) को जोड़ा गया है। MAX के सर्वर पूरी तरह से रूस के भीतर हैं। आलोचकों का कहना है कि इसके ‘बैकडोर एक्सेस’ सरकारी एजेंसियों के पास हैं, जिससे किसी भी नागरिक की बातचीत को रियल-टाइम में मॉनिटर किया जा सकता है। 2025 के अंत से रूस में बिकने वाले हर नए स्मार्टफोन में ‘MAX’ का होना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसने इसके यूजर बेस को कृत्रिम रूप से बढ़ा दिया है।
रूस का यह कदम ‘रुनेट’ की अवधारणा को साकार करता है। ‘रुनेट’ एक ऐसा ढांचा है जो रूस को वैश्विक इंटरनेट (WWW) से अलग होने की क्षमता देता है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर (X) और अब व्हाट्सएप के बाद रूस ने विदेशी सूचना स्रोतों को लगभग समाप्त कर दिया है। अब गूगल और यूट्यूब पर भी इसी तरह की तलवार लटकी हुई है। रूस अपनी जनता को केवल वही जानकारी देना चाहता है जिसे वह ‘उचित’ समझता है। विदेशी ऐप्स को हटाकर सरकार ने उस खिड़की को बंद कर दिया है जिससे बाहरी दुनिया के नैरेटिव रूस में प्रवेश करते थे।
इस बदलाव के कारण रूसी समाज और तकनीक के क्षेत्र में कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं व्हाट्सएप के ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन’ की सुरक्षा अब रूसी नागरिकों के पास नहीं रही। ‘MAX’ पर की गई हर बातचीत अब सरकारी निगरानी के दायरे में है। रूसी नागरिक अभी भी VPN के माध्यम से व्हाट्सएप चलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने VPN प्रोटोकॉल को पहचानने और उन्हें ब्लॉक करने के लिए ‘डीप पैकेट इंस्पेक्शन’ (DPI) तकनीक का उपयोग बढ़ा दिया है। कई रूसी व्यवसाय अपने ग्राहकों और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों से संपर्क करने के लिए व्हाट्सएप पर निर्भर थे। ‘MAX’ को अभी तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार नहीं किया गया है, जिससे व्यापारिक संवाद में बाधा आ रही है।
क्रेमलिन ने मेटा को पहले ही एक ‘चरमपंथी संगठन’ घोषित कर दिया था। व्हाट्सएप पर प्रतिबंध इस कानूनी लड़ाई का अंतिम चरण है। रूस ने साबित कर दिया है कि वह अपने राजनीतिक हितों के लिए करोड़ों उपयोगकर्ताओं की सुविधा का बलिदान दे सकता है। पश्चिमी देशों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक और प्रहार बताया है। वहीं, चीन जैसे देशों के लिए यह एक मॉडल की तरह है जहाँ राज्य का नियंत्रण तकनीक पर सर्वोपरि है।
विपक्ष और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि ‘MAX’ का उपयोग ‘सोशल क्रेडिट सिस्टम’ की तरह किया जा सकता है। चूंकि ऐप में भुगतान और सरकारी सेवाएं भी जुड़ी हैं, इसलिए सरकार के पास नागरिक के हर वित्तीय लेन-देन, यात्रा और व्यक्तिगत बातचीत का डेटा एक ही स्थान पर उपलब्ध होगा।
रूस का व्हाट्सएप को ब्लॉक करना और ‘MAX’ को थोपना यह दर्शाता है कि भविष्य का युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि ‘डेटा’ और ‘एल्गोरिदम’ के माध्यम से लड़ा जाएगा। ‘सेवा तीर्थ’ जैसे प्रशासनिक बदलावों के साथ, ‘MAX’ रूस के उस संकल्प का हिस्सा है जहाँ वह पश्चिमी तकनीकी गुलामी से मुक्त होना चाहता है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या एक ‘राष्ट्रीय मैसेंजर’ कभी उस वैश्विक विश्वास और सुरक्षा मानकों की बराबरी कर पाएगा जो व्हाट्सएप के पास थे? रूसी नागरिकों के लिए यह निर्णय एक ‘डिजिटल जेल’ की शुरुआत हो सकता है, जहाँ कनेक्टिविटी की कीमत उनकी ‘निजता’ है। ‘MAX’ का उदय और व्हाट्सएप का पतन डिजिटल दुनिया के ‘विखंडन’ (Splinternet) की सबसे बड़ी घटना है।



