
भारतीय गणतंत्र के प्रतीकों और औपचारिक मर्यादाओं के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। केंद्र सरकार द्वारा जारी हालिया शासनादेश (Mandate) ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर एक व्यापक और विस्तृत प्रोटोकॉल निर्धारित किया है। नए नियमों के अनुसार, अब तिरंगा फहराने और राष्ट्रपति के आगमन जैसे सर्वोच्च संवैधानिक अवसरों पर ‘वंदे मातरम्’ के 6-पदों (Stanzas) वाले विस्तृत संस्करण का गायन अनिवार्य होगा। यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं है, बल्कि यह भारतीय राष्ट्रवाद के सबसे शक्तिशाली उद्घोष को उसकी पूर्ण गरिमा और शास्त्रीय भव्यता के साथ पुनर्जीवित करने का एक गंभीर प्रयास है।
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1870 के दशक में रचित ‘वंदे मातरम्’ ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वह भूमिका निभाई जो दुनिया के किसी भी अन्य गीत ने नहीं निभाई। यह गीत ब्रिटिश राज के खिलाफ प्रतिरोध का मंत्र बन गया था। अब, 2026 में, भारत सरकार ने इसे आधिकारिक आयोजनों में एक नई और विस्तृत पहचान देने का निर्णय लिया है।
अब तक सामान्यतः ‘वंदे मातरम्’ के केवल पहले पद (Stanza) का गायन ही अधिकांश आधिकारिक कार्यक्रमों में प्रचलित था। संक्षिप्त संस्करण (करीब 52-60 सेकंड) का उपयोग समय की बचत और सुगमता के लिए किया जाता था। लेकिन नए शासनादेश ने इसे बदलकर 6-पदों तक विस्तारित कर दिया है।
6-पदों वाले संस्करण में राष्ट्र की प्रकृति, उसकी उर्वरता, शक्ति और आध्यात्मिक चेतना का विस्तृत वर्णन है। यह ‘सुजलाम्, सुफलाम्’ से आगे बढ़कर ‘त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी’ जैसे पदों के माध्यम से भारत की शक्ति और सांस्कृतिक गहराई को उजागर करता है। पहले अलग-अलग विभागों या राज्यों में इसके अलग-अलग छंद गाए जाते थे। नए प्रोटोकॉल से अब कन्याकुमारी से कश्मीर तक हर सरकारी संस्थान में एक ही मानक (Standard) संस्करण गूँजेगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 6-पदों वाला यह संस्करण हर छोटे कार्यक्रम के लिए नहीं है, बल्कि इसे ‘महत्वपूर्ण आधिकारिक अवसरों’ (Significant Occasions) के लिए आरक्षित रखा गया है भारत के राष्ट्रपति जब किसी राजकीय समारोह, संसद के संयुक्त सत्र या विशिष्ट नागरिक पुरस्कार समारोहों में पहुँचेंगे, तब उनके आगमन की घोषणा और सम्मान में इस विस्तृत संस्करण का गायन होगा। यह राष्ट्रपति पद की संवैधानिक गरिमा को और अधिक भव्यता प्रदान करेगा। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर जब लाल किले या राजपथ (कर्तव्य पथ) पर तिरंगा फहराया जाएगा, तब ‘जन गण मन’ के साथ-साथ ‘वंदे मातरम्’ के इस 6-पदों वाले संस्करण का गायन समारोह की दिव्यता बढ़ाएगा। राज्यपालों की नियुक्ति, शपथ ग्रहण समारोह या विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के स्वागत के समय भी इस प्रोटोकॉल का पालन किया जा सकता है।
गृह मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और विदेशी मिशनों (Embassies) को विस्तृत गाइडलाइन्स साझा की हैं। इसमें केवल पदों की संख्या ही नहीं, बल्कि गायन की तकनीकी बारीकियों पर भी जोर दिया गया है 6-पदों के गायन के लिए एक निश्चित समय सीमा (संभावित 3 से 4 मिनट) तय की गई है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि गायन न तो इतना तेज हो कि शब्द अस्पष्ट हो जाएं और न ही इतना धीमा कि वह नीरस लगे। सैन्य बैंडों (Military Bands) को नए स्वर-संयोजन (Score) दिए गए हैं। इसमें पारंपरिक भारतीय वाद्य यंत्रों के साथ पश्चिमी ब्रास बैंड का एक सामंजस्यपूर्ण मिश्रण होगा। जैसे राष्ट्रगान के समय सावधान की मुद्रा में खड़े होना अनिवार्य है, वैसे ही इन 6-पदों के गायन के दौरान भी सभी उपस्थित व्यक्तियों को पूर्ण अनुशासन और सम्मान की मुद्रा में रहना होगा।
1950 में जब भारत का संविधान लागू हुआ, तब राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की थी कि ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान (जन गण मन) के बराबर सम्मान और दर्जा दिया जाएगा। हालांकि, व्यवहार में इसे अक्सर दूसरे स्थान पर रखा गया। पहली बार रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे गाया था।सभा के सदस्यों के बीच इसे राष्ट्रगान बनाने को लेकर लंबी चर्चा हुई थी, लेकिन अंततः इसे ‘राष्ट्रीय गीत’ का दर्जा मिला। नया शासनादेश उस पुराने वादे को पूरा करने जैसा है, जहाँ ‘वंदे मातरम्’ को उसकी पूरी गरिमा के साथ राष्ट्रीय मंच पर पुनः स्थापित किया जा रहा है।
इस निर्णय के दूरगामी सामाजिक प्रभाव होने की संभावना है स्कूलों और कॉलेजों में अब इस 6-पदों वाले संस्करण को सिखाया जाएगा, जिससे युवा पीढ़ी इस गीत के पूर्ण अर्थ और काव्य सौंदर्य से परिचित हो सकेगी। एक समान गायन पद्धति नागरिकों में सामूहिक पहचान (Collective Identity) की भावना को मजबूत करती है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जब भारत का प्रतिनिधित्व होगा, तब इस विस्तृत संस्करण की भव्यता भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करेगी।
इतने लंबे गीत को आधिकारिक आयोजनों में शामिल करना प्रशासनिक रूप से कुछ चुनौतियां भी पेश कर सकता है व्यस्त कार्यक्रमों में 4 मिनट का अतिरिक्त समय निकालना एक चुनौती होगी। इसके लिए इवेंट मैनेजर्स को बारीकी से योजना बनानी होगी। स्कूलों, पुलिस और अर्धसैनिक बलों को इस नए संस्करण के अभ्यास के लिए पर्याप्त समय और संसाधनों की आवश्यकता होगी।
सरकार का यह कदम ‘मर्यादा और गौरव’ का एक अद्भुत संगम है। ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय चेतना का स्वर है। इसके 6-पदों को आधिकारिक प्रोटोकॉल में शामिल करना यह दर्शाता है कि आधुनिक भारत अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है और अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोने में उसे कोई संकोच नहीं है। जब राष्ट्रपति के आगमन पर इस गीत की धुन गूँजेगी, तो वह हर भारतीय को उस संघर्ष की याद दिलाएगी जिसने इस देश को स्वतंत्र बनाया और उस भविष्य की प्रेरणा देगी जो अखंड और शक्तिशाली है।



