बारामती का महाशोक: एक युग का अंत और सुरक्षा तंत्र पर सुलगते सवाल
अजीत पवार: प्रशासनिक अनुशासन का दूसरा नाम

यह एक अत्यंत हृदयविदारक और स्तब्ध कर देने वाली काल्पनिक घटना है। महाराष्ट्र के राजनीतिक इतिहास में यह दिन एक ‘काले अध्याय’ के रूप में दर्ज होगा। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दिग्गज नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार का एक विमान दुर्घटना में आकस्मिक निधन केवल एक परिवार या पार्टी की क्षति नहीं है, बल्कि यह पूरे राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक ढांचे के लिए एक भीषण आघात है।
बुधवार की सुबह जब सूरज की किरणें बारामती की धरती पर पड़ रही थीं, तब किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ ही घंटों में यहाँ का आसमान धुएं और चीखों से भर जाएगा। उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, जिन्हें महाराष्ट्र की राजनीति का ‘पावरहाउस’ कहा जाता था, अपने ही निर्वाचन क्षेत्र बारामती के हवाई अड्डे के करीब एक भीषण विमान हादसे का शिकार हो गए। आपातकालीन लैंडिंग के दौरान विमान का दुर्घटनाग्रस्त होना कई ऐसे सवाल छोड़ गया है जिनका उत्तर भविष्य की जांच ही दे पाएगी। अजीत पवार एक निजी चार्टर्ड विमान में सवार थे। उड़ान के दौरान तकनीकी खराबी की सूचना मिलने के बाद, अनुभवी पायलटों ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बारामती हवाई अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग (Emergency Landing) का निर्णय लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रनवे के पास पहुँचते ही विमान का संतुलन बिगड़ गया और वह जमीन से टकराने के साथ ही आग के गोले में तब्दील हो गया। मलबे के बिखरने की सीमा यह बताती है कि टक्कर कितनी भीषण थी। इस हादसे में अजीत पवार के साथ उनके दो निष्ठावान सुरक्षाकर्मी और दो कर्तव्यपरायण पायलटों ने भी अपनी जान गंवाई। इन पांचों की मृत्यु ने वीआईपी सुरक्षा के प्रोटोकॉल और चार्टर्ड सेवाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
महाराष्ट्र की राजनीति में ‘दादा’ के नाम से मशहूर अजीत पवार एक ऐसे नेता थे जिनकी पकड़ जमीनी कार्यकर्ताओं से लेकर मंत्रालय की फाइलों तक समान रूप से थी। बारामती को कृषि, शिक्षा और उद्योग का वैश्विक हब बनाने का श्रेय उन्हीं को जाता है। उन्होंने बारामती को अपनी कर्मभूमि बनाया और विडंबना देखिए कि नियति ने उन्हें उसी मिट्टी के करीब अपनी अंतिम सांस लेने के लिए चुना।
उन्हें उनके दो टूक फैसलों और प्रशासनिक कड़ाई के लिए जाना जाता था। सुबह 7 बजे मंत्रालय पहुँचकर काम शुरू कर देने की उनकी दिनचर्या ने पूरे प्रशासन को चुस्त-दुरुस्त रखा था। उनके निधन से राज्य ने एक ऐसा ‘क्राइसिस मैनेजर’ खो दिया है जिसकी भरपाई संभव नहीं है।
यह दुर्घटना भारत में निजी विमानन (Private Aviation) के क्षेत्र में छिपे खतरों की ओर इशारा करती है। क्या चार्टर्ड विमानों का रखरखाव (Maintenance) अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप किया जाता है? अक्सर देखा गया है कि निजी ऑपरेटर लागत बचाने के लिए सुरक्षा मानकों से समझौता करते हैं। क्षेत्रीय हवाई अड्डों पर आपातकालीन लैंडिंग के लिए आवश्यक अग्निशमन और बचाव उपकरण क्या पर्याप्त हैं? बारामती की घटना इस बात की गहन समीक्षा की मांग करती है। वीआईपी दौरों के दौरान अक्सर पायलटों पर प्रतिकूल मौसम या तकनीकी समस्याओं के बावजूद ‘उड़ान’ भरने का दबाव होता है। क्या इस मामले में भी ऐसा ही कुछ हुआ?
अजीत पवार केवल एक व्यक्ति नहीं थे, वे एक संस्थान थे। उनके निधन के बाद महाराष्ट्र की सत्ता समीकरणों में एक बड़ा बदलाव आने की संभावना है। वे विभिन्न गुटों और विचारधाराओं के बीच एक मजबूत कड़ी थे। उनके जाने से राकांपा (NCP) और वर्तमान सरकार के भीतर एक ऐसा खालीपन पैदा हो गया है जिसे भरना किसी के लिए भी आसान नहीं होगा। ‘दादा’ के लाखों समर्पित कार्यकर्ता आज अनाथ महसूस कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में पार्टी ने कई उतार-चढ़ाव देखे थे, लेकिन यह प्रहार सबसे घातक है।
केंद्र और राज्य सरकार को तुरंत इस मामले में डीजीसीए (DGCA) की उच्च-स्तरीय जांच और ‘ब्लैक बॉक्स’ के विश्लेषण के आदेश देने चाहिए। जब तक सत्य सामने नहीं आता, तब तक अफवाहों पर विराम लगाना कठिन होगा।अजीत पवार की यह विदाई न केवल उनके परिवार और प्रशंसकों के लिए शोक का विषय है, बल्कि यह लोकतंत्र के लिए एक सबक भी है। तकनीक चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, मानव जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। आज पूरा महाराष्ट्र मौन है, अपनी माटी के उस सपूत को विदाई देने के लिए जिसने राज्य की प्रगति के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।



