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‘प्रहार’: आतंकवाद के विरुद्ध भारत की नई सामरिक और वैचारिक ढाल का विस्तृत विश्लेषण

वैचारिक स्पष्टता: धर्म और राजनीति से ऊपर आतंकवाद

भारत सरकार द्वारा अपनी सुरक्षा नीति में एक बड़े युगांतरकारी बदलाव की घोषणा करते हुए सोमवार को देश की पहली व्यापक राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी नीति और रणनीति को जारी किया गया। इसे ‘प्रहार’ (PRAHAAR) नाम दिया गया है। यह दस्तावेज भारत के दशकों पुराने रक्षात्मक रवैये को एक सक्रिय, संगठित और ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहिष्णुता) वाली रणनीति में बदल देता है। ‘प्रहार’ केवल एक सैन्य नीति नहीं है, बल्कि यह एक ‘होल-ऑफ-सोसाइटी’ (समग्र समाज) फ्रेमवर्क है, जो यह स्पष्ट करता है कि आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई केवल वर्दीधारी जवानों की नहीं, बल्कि सवा सौ करोड़ भारतीयों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

दशकों से भारत सीमा पार और आंतरिक आतंकवाद का दंश झेलता रहा है। 1993 के मुंबई धमाकों से लेकर 26/11 और उरी-पुलवामा तक, भारत ने लंबी लड़ाई लड़ी है। ‘प्रहार’ नीति इस अनुभव का निचोड़ है। यह रणनीति भारत को एक ‘सॉफ्ट स्टेट’ की छवि से निकालकर एक ऐसे ‘सशक्त राष्ट्र’ के रूप में स्थापित करती है जो अपनी संप्रभुता के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

‘प्रहार’ नीति की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि इसकी वैचारिक स्पष्टता है। नीति ने आधिकारिक तौर पर घोषित किया है कि आतंकवाद को किसी भी धर्म, जाति, संप्रदाय या राष्ट्रीयता से नहीं जोड़ा जाएगा। यह भारत के उस स्टैंड को पुख्ता करता है जो वह वैश्विक मंचों पर वर्षों से कहता आया है। आतंकवाद को ‘अपराध’ के रूप में परिभाषित कर भारत ने उन तत्वों को बेनकाब किया है जो धर्म की आड़ में हिंसा फैलाते हैं। यह दृष्टिकोण अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत के पक्ष को और अधिक नैतिक बल प्रदान करता है।

पारंपरिक रूप से आतंकवाद से निपटने का काम खुफिया एजेंसियों और विशेष बलों (NSG, ATS) का माना जाता था। ‘प्रहार’ इस धारणा को बदल देता है। इस रणनीति के तहत आम नागरिकों, निजी क्षेत्र, मीडिया और शैक्षणिक संस्थानों को सुरक्षा ग्रिड का हिस्सा बनाया गया है। नीति में स्थानीय समुदायों और धार्मिक नेताओं के साथ मिलकर ‘डी-रेडिकलाइजेशन’ कार्यक्रमों पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य युवाओं को आतंकी विचारधारा के जाल में फंसने से पहले ही बचाना है।

आज का आतंकवाद केवल सीमा पार से घुसपैठ तक सीमित नहीं है; यह डार्क वेब, क्रिप्टोकरेंसी और एन्क्रिप्टेड चैट एप्स के माध्यम से संचालित होता है। नीति के तहत एक नई ‘नेशनल साइबर काउंटर-टेररिज्म यूनिट’ (NCCTU) के गठन का प्रस्ताव है, जो एआई (AI) आधारित मॉनिटरिंग के जरिए सोशल मीडिया पर आतंकी प्रोपेगैंडा को ट्रैक करेगी। सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन विरोधी (Anti-Drone) तकनीक और सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से घुसपैठ रोकने के लिए ‘प्रहार’ में विशेष बजटीय प्रावधान किए गए हैं।

आतंकवाद बिना वित्तपोषण के नहीं चल सकता। ‘प्रहार’ रणनीति में ‘मनी ट्रेल’ को जड़ से मिटाने के लिए सख्त उपाय किए गए हैं। बैंकों और वित्तीय संस्थानों को संदिग्ध लेन-देन की रिपोर्टिंग के लिए कड़े निर्देश दिए गए हैं। क्रिप्टोकरेंसी के जरिए आने वाले फंड को ट्रैक करने के लिए ब्लॉकचेन विशेषज्ञों की एक विशेष टीम तैनात की जाएगी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी की शक्तियों का विस्तार किया गया है ताकि वह विदेश में स्थित आतंकी संपत्तियों को भी फ्रीज करने के लिए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर सके।

‘प्रहार’ नीति भारत के ‘कॉम्प्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म’ (CCIT) के प्रस्ताव को वैश्विक स्तर पर सक्रिय करती है। भारत अब उन देशों के साथ ‘इंटेलिजेंस शेयरिंग एग्रीमेंट’ (ISA) को प्राथमिकता देगा जो ‘प्रहार’ के सिद्धांतों से सहमत हैं। नीति में विदेशी धरती पर छिपे आतंकियों को भारत लाने के लिए कूटनीतिक दबाव और कानूनी प्रक्रियाओं को तेज करने का एक स्पष्ट चार्टर दिया गया है।

‘प्रहार’ नीति यह सुनिश्चित करती है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कानून का शासन (Rule of Law) बना रहे। आतंकी मामलों के लिए ‘फास्ट ट्रैक’ अदालतों के गठन और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रियाओं में सुधार का प्रस्ताव है। नीति में स्पष्ट किया गया है कि आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई के दौरान निर्दोष नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की ‘डेमोक्रेटिक क्रेडेंशियल’ बनी रहे।

‘प्रहार’ रणनीति भारत की सुरक्षा संस्कृति में एक ‘पैराडाइम शिफ्ट’ है। यह दुनिया को बताता है कि भारत अब केवल एक ‘शिकार’ (Victim) नहीं है, बल्कि वह अपनी सुरक्षा का स्वयं नियंता (Architect) है। इस नीति की सफलता इसके क्रियान्वयन (Implementation) पर निर्भर करेगी, विशेषकर केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय में।

यह रणनीति न केवल आतंकियों के दिलों में खौफ पैदा करेगी, बल्कि आम भारतीय नागरिक के मन में यह विश्वास जगाएगी कि राष्ट्र उनकी सुरक्षा के लिए हर पल सजग है। ‘प्रहार’ के साथ, भारत ने 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने के लिए खुद को सामरिक रूप से सुसज्जित कर लिया है।

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