ओपिनियन
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IVF, सरोगेसी और आधुनिक मातृत्व: कानून की भूमिका
आज का समाज काफी तेजी से बदल रहा है। महिलाएं और पुरुष पुरानी परंपराओं से हटकर नए स्वरूप में परिवार…
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जब कल्पना मशीन बन जाए—क्या खोएगा इंसान?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI इंसानी कला की जगह लेने लगे, तो अभिव्यक्ति की दुनिया का भविष्य क्या होगा? क्या तकनीक…
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नई चिंता की दस्तक—बच्चों में बढ़ते हार्ट अटैक के पीछे छुपे कारण और समाधान
कुछ साल पहले तक ज्यादातर लोग ये मानते थे कि दिल से जुड़ी बीमारियाँ, खासतौर पर दिल का दौरा, केवल…
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बदलती किताब, बदलती सोच – एनसीईआरटी इतिहास में बदलाव और उसकी नई तस्वीर
आज के दौर में इतिहास केवल तारीखों और राजाओं की कहानी नहीं रह गया, बल्कि समाज के सोचने-समझने के तरीके…
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आंकड़ों की दीवार के पीछे – भारत में अधूरी पोषण गाथा
हर रोज़ जब सूरज उगता है, तब करोड़ों भारतीय एक साधारण सी उम्मीद के साथ दिन शुरू करते हैं आज…
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ई-स्पोर्ट्स: कठिन अभ्यास, लम्बा स्क्रीन टाइम और ग्राइंडिंग कल्चर
कुछ दशक पहले तक खेलों का मतलब था मैदान, धूल-मिट्टी, चीख-पुकार, जज़्बा और पसीना। आज, वही जज़्बा हज़ारों मील दूर…
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युवाओं में डिप्रेशन और एंग्जायटी: एक बदलती पीढ़ी की बेचैनी
हम ऐसी दुनिया में जी रहे हैं जहाँ आँखों के सामने सब कुछ तेजी से बदल रहा है। सुविधा, तकनीक…
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धार्मिक स्थलों का व्यवसायीकरण: आस्था या व्यापार?
भारत में जब लोग तीर्थ यात्रा पर निकलते हैं, तो वे केवल धार्मिक रिवाज़ों के पालन के लिए नहीं जाते…
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महंगी होती उच्च शिक्षा: वजहें, चुनौतियाँ, सुधार और असलियत
जब कोई छात्र कॉलेज में दाख़िला लेता है, तो वह सिर्फ डिग्री या किताबें नहीं, उस क्लासरूम के साथ भविष्य…
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लैबूबू डॉल: कल्पना से वैश्विक क्रेज़ तक
लैबूबू डॉल (Labubu Doll) की कहानी किसी आम खिलौने की तरह नहीं बल्कि एक कलाकार की कल्पना और ग्लोबल पॉप…
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युद्ध, व्यापार शुल्क और शेयर बाजार की हलचल – निवेशकों के लिए नई चुनौती
जब भी कोई शेयर बाजार की चर्चा करता है, तो सबसे पहले हमारे जेहन में रंग-बिरंगे चार्ट, ऊपर-नीचे भागती रेखाएँ…
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